मुकेश कुमार सिंह :::
*रक्षाबंधन का इतिहास एवं महत्व*











★रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है । भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर बलि राजा के अभिमान को इसी दिन चकानाचूर किया था । इसलिए यह त्योहार ‘बलेव’ नाम से भी प्रसिद्ध है ।महाराष्ट्र राज्य में नारियल पूर्णिमा या श्रावणी के नाम से यह त्योहार विख्यात है ।इस दिन लोग नदी या समुद्र के तट पर जाकर अपने जनेऊ बदलते हैं और समुद्र की पूजा करते हैं ।★रक्षाबंधन के संबंध में एक अन्य पौराणिक कथा भी प्रसिद्ध है ।देवों और दानवों के युद्ध में जब देवता हारने लगे,तब वे देवराज इंद्र के पास गए ।देवताओं को भयभीत देखकर इंद्राणी ने उनके हाथों में रक्षासूत्र बाँध दिया ।इससे देवताओं का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने दानवों पर विजय प्राप्त की ।तभी से राखी बाँधने की प्रथा शुरू हुई ।
★हिंदू पुराण कथाओं के अनुसार, महाभारत में,पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की कलाई से बहते खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर बांधा जिससे उनका खून बहना बंद हो गया ।तभी से कृष्ण ने द्रोपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था ।वर्षों बाद जब पांडव द्रोपदी को जुए में हार गए थे और भरी सभा में उनका चीरहरण हो रहा था तब कृष्ण ने भाई धर्म का पालन करते हुए,द्रोपदी की लाज बचाई थी ।
★एक अन्य उदहारण के अनुसार चित्तौड़ की राजमाता कर्मवती ने मुग़ल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजकर अपना भाई बनाया था और वह भी संकट के समय बहन कर्मवती की रक्षा के लिए चित्तौड़ आ पहुँचा था ।
★दूसरा उदाहरण अलेक्जेंडर व पुरू के बीच का माना जाता है ।कहा जाता है कि हमेशा विजयी रहने वाला अलेक्जेंडर भारतीय राजा पुरू की प्रखरता से काफी विचलित हुआ । इससे अलेक्जेंडर की पत्नी काफी तनाव में आ गईं थीं ।उसने रक्षाबंधन के त्योहार के बारे में सुना था ।सो, उन्होंने भारतीय राजा पुरू को राखी भेजी,तब जाकर युद्ध की स्थिति समाप्त हुई थी ।क्योंकि भारतीय राजा पुरू ने अलेक्जेंडर की पत्नी को बहन मान लिया था ।
★प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों के उपदेश की पूर्णाहुति इसी दिन होती थी ।वे राजाओं के हाथों में रक्षासूत्र बाँधते थे ।इसलिए आज भी इस दिन ब्राह्मण अपने यजमानों को राखी बाँधते हैं ।
★रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है ।इस दिन बहन अपने भाई को प्यार से राखी बाँधती है और उसके लिए अनेक शुभकामनाएँ करती है ।भाई अपनी बहन को यथाशक्ति उपहार देता है । बीते हुए बचपन की झूमती हुई यादें भाई-बहन की आँखों के सामने नाचने लगती है ।सचमुच,रक्षाबंधन का त्योहार हर भाई को बहन के प्रति अपने कर्तव्य की याद दिलाता है ।
★आजकल तो बहन-भाई को राखी बाँध देती है और भाई-बहन को कुछ उपहार देकर अपना कर्तव्य पूरा कर लेता है ।लोग इस बात को भूल गए हैं की राखी के धागों का संबंध मन की पवित्र भावनाओं से है ।
★यह जीवन की प्रगति और मैत्री की ओर ले जाने वाला एकता का एक बड़ा पवित्र पर्व है ।
*आप सभी को हमारी तरफ से रक्षाबंधन की हार्दिक और अकूत शुभकामनाएँ…*


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