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Wednesday, 3 August 2016


  • रिश्तों की भीड़ में फर्ज कुलाचें भरता है ।वहाँ जीवन में कुछ करना और करवाना एक सहज प्रक्रिया है ।लेकिन बगैर किसी रिश्ते के किसी के लिए कुछ करना आपका कोरा सद्कर्म है ।ऐसे कर्मों से आपके वजूद को सुर्खाबी पर लगते हैं ।

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